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ओवैशी के जहरीले नाखून

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अक्सर आईना साफ करने वाले यह देख नही पाते कि गन्दगी शीशे में नही उनके अन्दर है, जो उनके साथ देश की गरिमा को भी धूमिल करती है उनके अवांछनीय कृत्यों से प्रभावित होकर। देश में अराजकता का संदेश गूंजता रहे कुछ लोग ऐसा ही करने में गर्व समझते हैं और देश की शान्ति को अपने जहरीले नाखूनों से कुरेदते रहते हैं। देश के सम्मान को आहत करके क्यूं इतिहास में अपना दूषित चरित्र के रूप में गढ़ना चाहते हैं ऐसे लोग समझ पाना दुश्कर हो जाता है। अब ओवैशी को काफी दिनो से देश की एकता और अखण्डता इतना अधिक प्रभावित कर रही है कि वह भारत को टुकड़ो में देखने के लिये विचलित रहते हैं तभी तो उनके प्रत्येक रैली में अल्पसंख्यकों का शोषण, असहिष्णुता और देश का संविधान जैसे मुख्य बिन्दु घातक हथियारों के रूप में उनके शब्दो के द्वारा चलाये जाते हैं। महाराष्ट्र में एक रैली के दौरान ओवैशी ने सीधा कहा कि भारत में रहूंगा लेकिन भारत माता की जय नही कहूंगा, ऐसा किसी संविधान में नही लिखा है। यह अभिव्यक्ति की आजादी है ऐसा बोलने से उन्हे कोई नही रोक सकता, किन्तु इतना सब कहकर वह यह भूल गये कि देश के संविधान में यह भी नही लिखा है कि मार्ग रोककर भीड़ इकट्ठा करके कहीं भी नमाज पढ़ी जाय, संविधान में यह भी नही लिखा है कि देश का एक वर्ग परिवार नियोजन जैसी नीति का पालन करेगा और दूसरा वर्ग धर्म की आंड़ लेकर जनसंख्या वृद्धि करेगा। फिर संविधान की आंड़ लेकर भारत माता की जय न बोलने पर इतना बल किसलिये दिया जा रहा है ओवैशी द्वारा जबकि इससे पूर्व भी लोगो ने वंदेमातरम न बोलने की बात कही और देश में सम्मानित जीवन का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। क्या देश में रहने के लिये देश का विभाजन आवश्यक है जैसा कि ओवैशी के प्रत्येक भाषण में इस पर बल दिया जाता है। देश फिर भी जीवित मक्खी निगलने का आदी हो गया है जो ओवैशी की निरंकुशता को पनपने का अवसर दे रहे हैं। पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफ्रीदी ने बस इतना कहा कि उन्हे पाकिस्तान से ज्यादा भारतीय जनता से प्यार मिलता है, बस इतनी सी बात सभी पाकिस्तानियो सहित उनके आकाओ को अप्रिय लगी और उन्होने अफ्रीदी के प्रति असम्मानित टिप्पणी की झड़ी लगा दी, फिर भारत में रहकर भारत विरोधी टिप्पणी से आहत होकर कोई इसका विरोध करता है तो ओवैशी या उनके समर्थकों को खराब नही लगना चाहिये क्यूं कि यह विरोध करने वालों की अभिव्यक्ति की आजादी है। ओवैशी का इस प्रकार प्रत्येक स्तर पर देश प्रेमियों की भावनाओ पर अपने जहरीले नाखूनों का प्रयोग कर कुरेद कर किये जाने वाले घावों पर नियन्त्रण रखकर देश की शान्ति और एकता बनाये रखने में सहयोग करना चाहिये।

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