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बिलख रही विवश भारत माता

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बैठी आस लगाये तड़पती है भारत माता।
चीख रही बिलख रही विवश भारत माता।।

मॉ को क्या पता था पाप इन कपूत के,
गर्भ में पाल रही थी देख सपने सपूत के,
पैदा हुआ है नाग जो मॉ पर हंस रहा है,
देह मानव पाकर नाग जैसा डस रहा है,
पानी बना लहू में उबाल क्यूं नही आता।
बैठी आस लगाये तड़पती है भारत माता।

नोच रहे मॉ को भ्रष्टाचार के निवाले में,
उलझा हुआ है मानव लोभ के जाले में,
दुश्मनो के साथ बैठ खूनी ज़ाम पी रहे,
बेच मॉ की आबरू बेशर्म बेनाम जी रहे,
जाये मॉ किस ओर कोई राह तो दिखाता।
चीख रही बिलख रही विवश भारत माता।।

बलात्कार भ्रष्टाचार नीति बन गयी,
भाई मारे भाई को सुनीति बन गयी,
डरता नहीं है पापी कुदरत के कहर से,
मरता नहीं कुलघाती शब्दों के जहर से,
धंसा पाप की दलदल में अहंकार लुटाता।
चीख रही बिलख रही विवश भारत माता।।

होगा कभी जन्म आयेगा सिंह भगत,
आजाद बोस ऊधम दहलेगा ये जगत,
मॉ के कपूत सुन ले तू भाग नही पायेगा,
दुश्मनों के संग अपनी अर्थी तू सजायेगा,
मिलेगा नही कॉधा किसी से नही है नाता।
चीख रही बिलख रही विवश भारत माता।।

बैठी आस लगाये तड़पती है भारत माता।
चीख रही बिलख रही विवश भारत माता।।



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rachana के द्वारा
August 21, 2015

उच्च शिक्षण संस्थानों में कुलपतियों व कुलाधिपति से निष्पक्ष तरीके से राजधर्म निर्वहन करने की अपेक्षा किया जाना स्वाभाविक है| कुलपतियों व कुलाधिपति के आदर्श केवल समाचार पत्रों तक सिमित हैं व कार्यशैली में पारदर्शिता की बानगी नहीं दिखाती | मिसाल के तौर पर विश्वविद्यालयों में बायोमेट्रिक मशीन से कर्मचारियों के उपस्थिति में भेदभाव की गुन्जाईश न होने के कारण जिम्मेदारी को एक दूसरे पर थोप कर केवल समय काटा जा रहा है व कर्मचारिगण घर बैठ कर मोटी तनख्वाह उठा रहें हैं| ऐसा ही आलम विश्वविद्यालयों व कालेजो में नियम विरुद्ध नियुक्तियों के क्रम में भी है|

krishna kumar pandey के द्वारा
August 21, 2015

प्रणाम रचना जी, आपकी अभिव्यक्ति सराहनीय है जो भ्रष्टाचार का संक्षिप्त रूप प्रदर्शित कर रही है, ऐसा ही प्रत्येक स्तर पर लोग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए अग्रसर है जिसका परिणाम देश को हानि पंहुचा रहा है, ऐसी परिस्थिति में जागरूकता का महत्व अधिक है किन्तु लोग उससे बचना चाहते हैं और सुनी सुनाई बातों को आधार मानकर निर्णय लेने में स्वयं को सक्षम समझते हैं, धन्यवाद.


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