social

Just another Jagranjunction Blogs weblog

51 Posts

1588 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 20079 postid : 949666

मैं कह नहीं सकता

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आंखो को करके बन्द मैं चुपचाप हूं रहता,
रखकर जुबान बन्द क्यूं खामोश हूं रहता।
सब देखता हूं भय से बनकर मैं चौकीदार,
कुछ कह नही सकता, मैं कह नहीं सकता।।

मैं झूठ का सौदागर हूं, मैं कह नहीं सकता,
मैं कितना सितमगर हूं, मैं कह नहीं सकता,
मैं जनक भ्रष्टाचार का, मैं कह नहीं सकता,
मैं जनक अत्याचार का, मैं कह नहीं सकता,
कितना भरा खजाना जनता को लूट करके,
मैं बन गया मसीहा, मैं कह नही सकता।
कुछ कह नही सकता, मैं कह नहीं सकता।।

मैं नाम वासना का, मैं कह नही सकता।
मैं शत्रु साधना का, मैं कह नही सकता।
करता हूं प्रभू से चोरी, मैं कह नही सकता।
भरी पाप की है बोरी, मैं कह नही सकता।
करता हूं दान पुण्य कितना मैं रात दिन,
निर्धन को लूटता हूं मैं कह नही सकता।।
कुछ कह नही सकता, मैं कह नहीं सकता।।

मैं रूप आरक्षण का, मैं कह नहीं सकता,
मैं वृक्ष हूं इस जड़ का, मैं कह नहीं सकता,
हूं शिक्षा का व्यापारी, मैं कह नही सकता,
क्यूं फैली बेरोजगारी, मैं कह नही सकता,
दिन रात करता शोषण कितने गरीब का,
मर जाते रोज कितने, मैं कह नही सकता।
कुछ कह नही सकता, मैं कह नहीं सकता।।

रिश्तो को मैं हूं तोड़ता, मैं कह नही सकता,
हर प्रश्न को क्यूं छोड़ता, मैं कह नही सकता,
मैं डरता नहीं किसी से, मैं कह नही सकता,
दूर रहता क्यूं खुशी से, मैं कह नहीं सकता,
मैं कत्ल का सौदागर बैठा हूं कत्लखाने में,
क्यूं कट जाते धर्म जाति, मैं कह नहीं सकता।
कुछ कह नही सकता, मैं कह नहीं सकता।।

आंखो को करके बन्द मैं चुपचाप हूं रहता,
रखकर जुबान बन्द क्यूं खामोश हूं रहता।
सब देखता हूं भय से बनकर मैं चौकीदार,
कुछ कह नही सकता, मैं कह नहीं सकता।।



Tags:                         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amitshashwat के द्वारा
July 21, 2015

कहने ही की धारा है जिसमे आपने न कहके सब कह दिया ।कहने वाले कहकर भी कुछ नही कह पाते ।धनयवाद। 

krishna kumar pandey के द्वारा
July 22, 2015

आपका बहुत बहुत आभार सहित धन्यवाद अमित जी, सामाजिक सच उभारने का छोटा प्रयास मात्र है, कहनेवाले कुछ कह नहीं सकते वाली बात पर कहना चाहूँगा कि कहेगा कौन ज्यादातर ऐसे ही व्यक्तित्व का चित्रण इस लेख में है जिसमे वह स्वयं संलिप्त है फिर कैसे अपनी प्रतिभाओ को समाज के सामने वह स्वयं रख सकते हैं

Shobha के द्वारा
July 22, 2015

श्री कृष्ण कुमार जी जो चाहे कहिये यदि जागरण वालों की कृपा रही हम सब आपके लेखन पर प्रतिक्रिया भी द8

krishna kumar pandey के द्वारा
July 23, 2015

प्रणाम शोभा जी, आपका आभार सहित धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए और सदैव आपकी प्रतिक्रियाओ का इंतजार रहेगा

jlsingh के द्वारा
July 31, 2015

बहुत ही सुन्दर शैली में आपने सारी बातें कह दी. सुन्दर बनी है रचना, मैं कह सकता हूँ.

krishna kumar pandey के द्वारा
August 3, 2015

आपका बहुत बहुत आभार श्री जे.एल. सिंह जी, सामाजिक चित्रण को सजीवता प्रदान करने का प्रयास मात्र है “मै कह नहीं सकता”, आपकी प्रतिक्रिया से मनोबल बढा, धन्यवाद आपको.

Kevrel के द्वारा
July 12, 2016

Mette, this is wouYlrfne!!!dou are an excellent photographer!!! I always like your landscapes. Very compelling and very excellent photograph!I wish you a happy weekend .Stay warm, my dear Mette.


topic of the week



latest from jagran